पुराने समय में चूल्हे की आंच पर रोटी सीखी जाती थी। लेकिन आजकल घर घर में सिलेंडर मौजूद है। अब रोटियां गैस की आंच पर ही बनाई जाती है। बहुत से घरों में रोटी गैस की आंच पर सीधे ही सेखी जाती है। कहा जाता है कि ऐसा करने से कैंसर का खतरा कई गुना तक बढ़ जाता है।
तो इस बात में कितनी सच्चाई है चलिए आज की आर्टिकल में जानते हैं।
बहुत से लोग जल्दी-जल्दी खाना बनाना चाहते हैं। ऐसे में शॉर्टकट अपनाते हैं। गैस की आंच पर रोटी जल्दी पकती है। इसलिए ज्यादातर लोग रोटी बनाते समय सीधे आंच पर ही उसे सेख लेते हैं।
कहा जाता है कि गैस की आंच पर रोटी पकाते समय इसमें कई तरह के केमिकल्स आ जाते हैं। इतना ही नहीं बहुत ज्यादा आंच पर रोटी पकाने से वे हेट्रो साइक्लिक एमाइल यानी कि एचसीए और पॉली साविक एरोमेटिक हाइड्रोकार्बन यानी कि पीएएच जैसे कार्सिनोजेंस के कांटेक्ट में आ जाती है।
गैस पर रोटी सेकने से कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड समेत कई खतरनाक प्रदूषक भी रोटी में आ सकते हैं। जिससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है।
कई सारे डॉक्टर्स का यह दावा है कि पहले के जमाने में रोटियां तवे पर दूसरी रोटी से दबाकर या किसी कपड़े की मदद से दबाकर पकाई जाती थी। लेकिन अब चिमटे का इस्तेमाल होता है। इससे आंच पर रोटियां सीधे ही सेकी जाती हैं। आंच पर रोटी सेकने से उसमें कई प्रदूषक तत्व आ सकते हैं। जिससे रोटी जहरीली हो जाती है और उसे खाने से कैंसर जैसी बीमारियों का जोखिम भी बढ़ जाता है।
रोटी हमेशा ही हल्की या मीडियम फ्लेम पर सेकनी चाहिए। कोशिश करें कि गैस के फ्लेम में रोटी सीधे कांटेक्ट में ना आए। ज्यादा आंच पर रोटी सेकने से कार्सजोनिक्स रिलीज होता है। जो रोटी को हार्मफुल बना देता है। चिमटे या टोंग की मदद से रोटी को सीधे गैस पर रखने से रोटी में कई सारे हार्मफुल सब्सटेंसस ऐड हो जाते हैं। यानी कि देखा जाए तो यह कहना गलत नहीं होगा कि गैस की रोटी से कैंसर का खतरा ज्यादा बढ़ता है।
(ये आर्टिकल में सामान्य जानकारी आपको दी गई है अगर आपको किसी भी उपाय को apply करना है तो कृपया Expert की सलाह अवश्य लें)
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