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DLS का वो नियम जो काफी बार चर्चा में रहता है वो कैसे तैयार हुआ? किसने ये नियम बनाया? How was the DLS rule, which is often discussed, prepared?



ब्रिटेन के बहुत ही मशहूर रेडियो कमेंटेटर हुए हैं क्रिस्टोफर मार्टिन। जिस दौर में मैदान में रहने के अलावा क्रिकेट को कंज्यूम करने का तरीका सिर्फ रेडियो ही था उस वक्त क्रिस्टोफर मार्टिन वह दूत हुआ करते थे जो दूर कहीं हो रहे उस मैच को आपके कानों में जिंदा कर देते थे। 
DLS Rules In Cricket


22 मार्च 1992 को भी ऐसा ही हुआ था जब सिडनी में दक्षिण अफ्रीका और इंग्लैंड के बीच सेमीफाइनल हो रहा था। मैच में बारिश आई। ना जाने किस तरीके से टारगेट 13 बॉल से 22 रन से बदलकर एक बॉल पर 21 रन हो गया। साउथ अफ्रीका का दिल टूटा तो उसको बयां करने के लिए क्रिस्टोफर मार्टिन ने रेडियो पर यही कहा कि इस मैच को देखने के बाद कहीं तो कोई ऐसा होगा जो एक बेहतर सॉल्यूशन के साथ आएगा जो क्रिकेट की इस समस्या को दूर कर पाएगा। इस कमेंट्री को ब्रिटेन में बैठे फ्रैंक डकवर्थ भी सुन रहे थे। एक प्रोफेसर जो गणित का जानकार था और किसी भी फार्मूले को निकालने का मास्टर था। जब फ्रैंक डकवर्थ ने उस बात को सुना तो बस यही कहा कि यह क्रिकेट की समस्या नहीं है यह सिर्फ गणित के समस्या। है। 

फ्रैंक डकवर्थ ने तब से उस फॉर्मूले पर काम शुरू किया उन्होंने तब एक पेपर लिखा जिसका टाइटल फेयर प्ले इन फाउल। इसमें क्रिकेट में सुधार के इस फॉर्मूले को सुझाया गया था। यहां से ही क्रिकेट को डकवर्थ लुईस नियम का रास्ता मिला। बीते 21 जून को जब टी20 वर्ल्ड कप में इस फॉर्मूले का इस्तेमाल किया जा रहा था उसी वक्त इस नियम को बनाने वाले फ्रैंक डकवर्थ ने अंतिम सांस भी ली। 25 जून को यह जानकारी सार्वजनिक की गई कि फ्रैंक डकवर्थ ने 86 साल की उम्र उम्र में अंतिम सांस ली है। वह काफी बीमार थे और अब दुनिया को अलविदा कह चुके हैं।

आंकड़ों से खेलने वाले इस प्रोफेसर को हमेशा ही क्रिकेट को दिए गए इस नायाब फॉर्मूले के लिए याद किया जाएगा। उन्होंने कई और फॉर्मूले भी लिखे हैं जो विज्ञान और गणित के क्षेत्र में याद किए जाते हैं लेकिन इनमें सबसे ऊपर डीएल मेथड ही रहा। डकवर्थ के जिस पेपर का हमने जिक्र किया जब इंग्लैंड के ही एक और दूसरे स्टैटिन टॉनी लुईस ने इसे पढ़ा तो वो भी उनका साथ देने के लिए पहुंच गए। 1992 से इन दोनों ने इस नियम पर काम करना शुरू किया। इस फार्मूले को तैयार किया गया और फिर 1997 में जाकर पहली बार इस फॉर्मूले को क्रिकेट में इस्तेमाल किया गया, लेकिन आईसीसी को 1999 तक का वक्त लगा जब इसे पूरी तरह से स्वीकारा गया हो। इसके बाद आईसीसी ने बारिश आने या फिर किसी दूसरी वजह से मैच के रुक जाने पर इस नियम को अपनाने की बात की। 

अब डीएलएस एक ऐसा नियम बना जिसे समझना हर क्रिकेट फैन के लिए मुश्किल ही रहा। हर बार जब इसका इस्तेमाल होता है तो आप और हम जैसे क्रिकेट फैन यही सोच रहे होते हैं कि आखिर यह फार्मूला क्या है ?

डकवर्थ और लुईस की ओर से जो फार्मूला सुझाया गया उसमें बेसिक चीज जो बताई गई है वह यही रही कि किसी भी टीम के पास मैच शुरू होने से पहले दो ही रिसोर्स होते हैं पहला 50 ओवर का खेल और दूसरा हाथ में 10 विकेट। जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ता है यह  सोर्स कम होने लगते हैं और फिर एक बेसिक फार्मूला जो बताया जाता है कि टीम टू का जो टारगेट दिया गया है उसके लिए टीम वन के स्कोर को गुणा कर दिया जाता है उस टोटल से जो टीम टू के रिसोर्स और टीम वन के रिसोर्स से भाग करने पर आता है। 

अब आप कहेंगे कि इससे तो क्या ही समझ में आएगा। इसलिए रहने देते हैं क्योंकि इस नियम को समझने की मुश्किल सिर्फ आपको या हमें नहीं बल्कि उन सभी लोगों को है जो क्रिकेट को जीने की बात करते हैं। डकवर्थ लुईस के इस नियम में समय-समय में बदलाव भी हुए हैं। 2014-15 में जब आईसी ने स्टीवन स्टर्न को इस नियम का कस्टोडियन बनाया तो यह नियम डीएल से डीएलएस हो गया। अभी भी कई बोर्ड कई टीमें और कई खिलाड़ी इस नियम का विरोध करते हैं क्योंकि इसमें कुछ ऐसा नहीं है जो आसानी से किसी के समझ में आ जाए। 

इस मुश्किल कहानी का अंत एक मजेदार किस्से से करते हैं। t20 का जब दौर आया तब इसमें थोड़ा फन भी ढाला गया। पारियों के बीच में कुछ शोज रखे जाने लगे जहां बैंड परफॉर्म किया करते थे। डिवाइन कॉमेडी बैंड के राइटर नील हेनन और थॉमस वल्स ने एक ऐसा ही मजे लेने वाला गाना बनाया जिसका नाम था मीटिंग मिस्टर मियादद। इस गाने के लिए बैंड का जो नाम रखा गया वो द डकवर्थ लुईस मेथड था। यूट्यूब पर आप इसे सर्च भी कर सकते हो। 

(ये आर्टिकल में सामान्य जानकारी आपको दी गई है अगर आपको किसी भी उपाय को apply करना है तो कृपया Expert की सलाह अवश्य लें)

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