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पितृपक्ष पर किस दिन पड़ रहा है कौन सा श्राद्ध है ? Which Shraddha is falling on which day of Pitru Paksha?

हिंदू पौराणिक मान्यताओ मे पितृदान या पिंडदान का बहुत महत्व माना जाता है। इस साल पितृदान 17 सितंबर से शुरू होने वाला है। 

पितृपक्ष में लोग अपनी पित्रों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और कई सारे अन्य धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। लोग अपने पूर्वजों की तृप्ति के लिए भोजन और जल अर्पित करते हैं। साथ ही ब्राह्मणों को भोजन कराने का भी बहुत महत्व है। उन्हें दान दक्षिणा देकर पितृ की आत्मा की शांति की प्रार्थना करते हैं। 

अगर बात करें इसकी तिथि की तो यह हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से लेकर अश्विनी महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि तक रहता है। इस साल पितृ पक्ष 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक रहेगा। 
पितृपक्ष पर किस दिन पड़ रहा है कौन सा श्राद्ध है ?


आइए आपको बताते हैं कि किस दिन कौन सा श्राद्ध पड़ेगा ?


पितृ पक्ष के दौरान शुभ व मांगलिक कार्य जैसे शादी विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन या नई चीजों की खरीदारी पर पूरी तरीके से प्रतिबंध होता है। इसमें केवल पित प को श्राद्ध करने की परंपरा है। पितृपक्ष में तिथि अनुसार ही पित्रों का श्राद्ध किया जाता है। 

आइए आपको पहले श्राद्ध से लेकर आखिरी सर्व पित्री अमावस्या की तिथि बताते हैं। 


  • पहला श्राद मंगलवार 17 सितंबर को पूर्णिमा श्राद
  • बुधवार 18 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध
  • गुरुवार 19 सितंबर को द्वितीय श्राद्ध
  • शुक्रवार 20 सितंबर को तृतीय श्राद्ध
  • शनिवार 21 सितंबर को चतुर्थी श्राद्ध
  • रविवार 22 सितंबर को पंचमी श्राद्ध 
  • सोमवार 23 सितंबर को षष्ठी श्राद्ध और सप्तमीं श्राद
  • मंगलवार 24 सितंबर को अष्टमी श्राद्ध
  • बुधवार 25 सितंबर को नवमि श्राद 
  • गुरुवार 26 सितंबर को दशमी श्राद्ध 
  • शुक्रवार 27 सितंबर को एकादशी श्राद्ध 
  • शनिवार 29 सितंबर को द्वादशी श्राद्ध 
  • रविवार 30 सितंबर को त्रयोदशी श्राद
  • सोमवार 1 अक्टूबर को चतुर्दशी श्राद और 
  • मंगलवार 2 अक्टूबर को सर्व पित्री अमावस्या श्राद्ध पड़ रही है। 

किस समय करना चाहिए श्राद्ध क्रम?


शास्त्रों की माने तो पितृ पक्ष में सुबह और शाम का समय देवी देवताओं की पूजा के लिए होता है। जबकि दोपहर का समय पित्रों को समर्पित होता है। इसलिए पित्रों का श्राद दोपहर के समय ही करना सबसे फलदाई माना जाता है। पितृ पक्ष में आप किसी भी तिथि पर दोपहर 12 बजे के बाद ही श्राद्ध कर सकते हैं। इसके लिए कुतुब और रोहिण मुहूर्त सबसे अच्छे माने जाते हैं। 

(ये आर्टिकल में सामान्य जानकारी आपको दी गई है अगर आपको किसी भी उपाय को apply करना है तो कृपया Expert की सलाह अवश्य लें)

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