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Who has the world record for losing the most elections? क्या चुनाव लड़ना किसी का शौक भी हो सकता है?



हिंदुस्तान दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यहां चुनाव होता है तो दुनिया देखने आती है। अगर 100 करोड़ लोग वोट डालेंगे तो देखने वाली बात होती ही है। चुनाव बहुत जरूरी होता है इस पर लाखों लोगों का भविष्य भी निर्भर होता है यानी यह बहुत ही सीरियस मामला है। 
Who has the world record for losing the most elections?


क्या चुनाव लड़ना किसी का शौक भी हो सकता है?


सोचिए कि क्या चुनाव लड़ना किसी का शौक भी हो सकता है ? वो भी ऐसा शौक कि सिर्फ हार से ही मतलब हो एक दो हार नहीं बल्कि 200 से ज्यादा हार। तमिलनाडु के रहने वाले के पद्म राजन की कहानी भी ऐसी ही है। जिनके नाम सबसे ज्यादा चुनाव हारने का रिकॉर्ड दर्ज है। 

आज कहानी भारत के इलेक्शन किंग की जिनके नाम रिकॉर्ड दर्ज है कि उन्होंने सबसे ज्यादा बार चुनाव हारा है।

केरल की थिरुसर लोकसभा सीट पर इस बार बीजेपी ने साउथ के सुपरस्टार सुरेश गोपी को मैदान में उतारा है। माना जा रहा है कि वह शायद इस सीट पर कोई कमाल भी कर दे लेकिन इसी सीट पर एक निर्दलीय भी चुनाव लड़ रहा है जिनका नाम है के पद्म राजन। पद्म राजन इलेक्शन किंग है जो बार-बार चुनाव लड़ते हैं। यह 240 वी बार है जब वह किसी चुनावी मैदान में खड़े हैं।

किस किस के खिलाफ लाडे है चुनाव?


विधायक से लेकर सांसद तक और राष्ट्रपति के चुनाव तक में के पद्म राजन ने किस्मत आजमाई है। नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी, अटल बिहारी वाजपेई, द्रौपदी मुरमू। आप बस नाम लीजिए इन सभी बड़े नामों का चुनाव देखेंगे तो मालूम पड़ेगा कि के पद्मा  राजन ने इन सभी के खिलाफ कभी ना कभी तो चुनाव लड़ा ही है। लेकिन आज तक कोई भी चुनाव वह जीत नहीं पाए हैं। कमाल तो यह है कि आज तक के रिकॉर्ड में पद्म राजन को जितने भी वोट मिले हैं उसमें सबसे ज्यादा वोट की संख्या सिर्फ 6000 ही रही है, लेकिन वह ऐसा क्यों करते हैं कैसा शौक है यह।

के पद्म राजन की उम्र अभी 65 बरस है। उन्होंने पहले बार चुनाव साल 1988 में लड़ा था। तमिलनाडु के मैथर से आने वाले पदमाराजन ने पहली बार चुनाव घर की सीट से ही लड़ा था लेकिन हार गए थे। फिर इसके बाद मानो ये चस्का ही लग गया। एक के बाद एक करते हुए पदमाराजन ने 239 चुनाव लड़ लिए हर बार उन्हें हार ही मिली लेकिन यह चुनाव लड़ने का जुनून ही था कि वह लगातार लड़ते ही चले गए। 

कोई भी ऐसा कानून नहीं है कि आपको निर्दलीय चुनाव लड़ने से रोक सके। पद्मा राजन वैसे तो एक साइकिल की दुकान चलाते हैं। दुकान पर इस वक्त साइकिल से ज्यादा अवार्ड रखे हुए हैं जो चुनाव हारने की वजह से मिले हैं। अगर इतने चुनाव लड़े हैं तो खर्चा भी हुआ होगा। पद्मा राजन ने अभी तक लगभग एक करोड़ रुपए अपनी जमान तों में ही गवा दिए हैं क्योंकि ऐसा कोई चुनाव गया नहीं जिनमें उनकी जमानत जप्त ना हुई हो। और उसकी भरपाई तो करनी ही पड़ती है। 

2019 का लोकसभा चुनाव हुआ तो के पदमाराजन ने राहुल गांधी के खिलाफ वायनाड से पर्चा भर दिया। उनको कुल सिर्फ 2000 से भी कम वोट मिले। कुछ चुनाव तो ऐसे भी लड़े उन्होंने जिन पर उनको एक भी वोट नहीं मिल यानी कि नील बटे सन्नाटा। इन्हीं हार की वजह से के पद्म आजन का नाम गिनीज वर्ल्ड बुक रिकॉर्ड में आया हुआ है। 

अब लगता यह है कि पद्म राजन का काम मुख्य काम सिर्फ चुनाव लड़ना है और बीच-बीच में वह अपनी साइकिल की दुकान भी चला लिया करते हैं। लंबी मूछे रखने वाले पद्म राजन कहते हैं अब तो जिस दिन मैं चुनाव जीतूंगा शायद उस दिन मुझे हार्ट अटैक आ जाए। इसलिए बस हारने के लिए ही चुनाव लड़ता हूं। 
क्या आप भी ऐसे किसी शख्स को जानते हैं जो चुनाव हारता जा रहा है और फिर भी लड़ रहा है ?

(ये आर्टिकल में सामान्य जानकारी आपको दी गई है अगर आपको किसी भी उपाय को apply करना है तो कृपया Expert की सलाह अवश्य लें)

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