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NCERT की किताबों में Ram Mandir,Babri Masjid से जुड़े Chapters में बदलवा किया गया



एनसीआरटी यानी नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग।
NCERT की किताबों

 
इनकी किताबें 5 करोड़ से भी ज्यादा छात्रों को और पूरे देश में 18 से ज्यादा राज्यों में पढ़ाई जाती है। आपने भी अपने जमाने में इन्हीं किताबों से हिस्ट्री, ज्योग्राफी और साइंस पढ़ी होगी। लेकिन अब अगर आप अपने छोटे भाई बहनों की ही हिस्ट्री की किताबें खोलकर देखेंगे तो आपको उससे कुछ हिस्से कुछ विषय गायब नजर आएंगे। हाल ही में इन किताबों में एक और बदलाव किया गया है। अब भगवान राम से लेकर श्री राम, बाबरी मस्जिद, रथ यात्रा और विध्वंस के बाद की हिंसा की जानकारी को एनसीआरटी से हटा दिया गया है। 

12वीं क्लास की पॉलिटिकल साइंस के सिलेबस में कई बड़े बदलाव करते हुए बाबरी मस्जिद नाम के बजाय किताब से इसे सिर्फ तीन गुंबद संरचना के रूप में पढ़ाया जाएगा। इसके अलावा अयोध्या के चैप्टर को भी चार पेजों से कम करके दो पेजों तक कर दिया गया है। लेकिन ऐसा पहली बार नहीं है जब मोदी सरकार के होते हुए एनसीआरटी किताबों में बदलाव किया गया हो। इससे पहले भी कई सरकारे इतिहास की किताबों में बदलाव कर चुकी हैं। 

आज हम इन्हीं संशोधनों के बारे में आपको बताएंगे
स्कूली किताबों की हमेशा एक देश का नैरेटिव सेट करने में अहम भूमिका रहती है। क्योंकि वही 11वीं 12वीं के छात्र आगे जाकर वोटर्स बनते हैं और इन्हीं जानकारी के आधार पर कहीं ना कहीं वो एक फैसला भी बनाते हैं। यहां तक कि यूपीएससी जैसी परीक्षाओं के लिए भी एनसीआरटी पढ़ने की ही सलाह दी जाती है और एनसीआरटी किताबें पहले भी इस तरह के विवादों में घिर चुकी है। जहां सरकार पर यह आरोप लगाया जाता है कि वह इतिहास को फिर से लिखने की कोशिश कर रहे हैं। इसके शुरुआत तब से हुई थी जब अटल बिहारी वाजपेई की सरकार थी। तब यह आरोप लगाया जाता था कि भाजपा सरकार की ओर से मुस्लिम शासकों को एनसीआरटी किताबों में गलत दिखाया जा रहा है। फिर इसके बाद जब 2004 में यूपीए की सरकार आई तब इन किताबों को बंद कर दिया गया। इसके बाद 2012 में कांग्रेस ने उन कार्टूंस को एनसीआरटी किताबों से हटा दिया जो उनकी जवाहरलाल नेहरू और बीआर अंबेडकर के खिलाफ थे। या फिर यूं कहे तो आपत्ति जनक थे। इसके बाद 2014 में भाजपा की सरकार फिर से आई और एक बार फिर एनसीआरटी किताबों में बदलाव किए गए। साल 2017 में एनसीआरटी ने 182 किताबों को अपडेट किया। इनमें स्वच्छ भारत, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, डिजिटल इंडिया जैसे टॉपिक्स को जोड़ा गया। इसके बाद 2018 से 19 के बीच शिवाजी महाराज, सुभाष चंद्र, स्वामी विवेकानंद के बारे में कक्षा सातवीं की किताब में शामिल किया गया। 

इसके बाद से ही 2019 में ही हिस्ट्री की किताबों से कुछ हिस्सों को हटा दिया गया। इसमें भारत चीन में राष्ट्रवाद, क्रिकेट के इतिहास के बारे में कुछ चैप्टर शामिल थे। समाज और इतिहास इस सब को भी 10वीं कक्षा की किताबों से हटा दिया गया था। इसके बाद सबसे अहम 2022 में 2002 में हुए गोधरा कांड का हिस्सा हटा दिया गया। इसके अलावा इसी हिसा के खिलाफ अटल बिहारी वाजपेई के बयान तक हटा दिए गए। गोदरा हिस्सा का पूरा कालक्रम हटा दिया गया। नेहरू अंबेडकर द्वारा लिखे गए कोट्स हटा दिए गए और नक्सली आंदोलनों का हिस्सा भी छोटा कर दिया गया। 

कृषि कानूनों पर एक डिस्कशन बॉक्स हिस्ट्री की किताबों में हुआ करता था उसे भी हटा दिया गया। सांप्रदायिक स्तर पर जो राजनीतिक का चैप्टर था उसे भी छोटा कर दिया गया। मुगल शासन से संबंधित भागों को छोटा कर दिया गया और इसमें मामलू कों खिलजी दिल्ली सल्तनत के साथ-साथ बाकी इस्लामी शासकों के इतिहास अलग-अलग पन्नों में छोटे कर दिए। हालांकि तब केंद्र सरकार की ओर से यह कहा गया था कि यह बदलाव कोविड के बाद छात्रों पर बोझ कम करने के मोटिव से किए जा रहे थे। लेकिन कई एक्सपर्ट्स का यह मानना था कि इतिहास के कुछ अहम हिस्सों को किताब से हटाना एक राजनीतिक कदम के तौर पर देखा जाता है। 

गांधी जी की मृत्यु का देश में सांप्रदायिक स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ा ?

गांधी की हिंदू मुस्लिम एकता की खोज ने हिंदू चरमपंथियों को उकसाया और आरएसएस जैसे संगठनों पर कुछ समय के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया था। इन सब हिस्सों को भी कक्षा 12वीं के हिस्ट्री बुक से हटा दिया गया। और अब बाबरी मस्जिद और बाकी के हिस्से को भी एनसीआरटी किताबों से हटा दिया गया है। कहा जाता है कि इतिहास खुद को दोहराता है लेकिन अगर इतिहास से जुड़े किस्से कहानियों को ही अगर हटा दिया जाएगा तो कैसे युवा पीढ़ी इतिहास से जुड़ी बातों को जान पाएगी और उन्हें पारदर्शिता के चश्मे से देख पाएगी। 

(ये आर्टिकल में सामान्य जानकारी आपको दी गई है अगर आपको किसी भी उपाय को apply करना है तो कृपया Expert की सलाह अवश्य लें)

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